कुछ चुरा लिया है तुमने
कुछ चुरा लिया
है तुमने
धीरे-धीरे
वो सब
जो था तो
प्यारा और सुंदर
निभ रहा था
भा भी रहा था
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
साथ चल भी रहा था
सिमट सा गया है
दुबक सा गया है
बुझ सा गया है
संभालो इसे
इसको रास्ते नये चाहिए
उजड़ी बिखरी
ऊबड़ खाबड़
राहों पर कब तक
घसीटोगे उसको
छिल गये हैं
अब तो किसी नई
राह को तलाशो
वो भी था ज़माना
कुछ और
कब तक उन्हीं लकीरों को
पिटोगे
नए कपड़े नए साज और श्रृंगार
नित करते तो हो
क्यों पुरानी कवायदों
कवायदों की खातिर
बस अटके हो
नया कुछ सोचते
क्यों नहीं हो
पुराना डेटा हटाओगे
न जब तक
नया कैसे
लाओगे तुम भी
हटाओ रुख से पर्दा
दिखाओ अपना जलवा
ये दुनिया मिली है
खिलाओ इसमें नय गुल
यही है वो दुनिया
जो उसने बनाई है
सब आयेंगे
जायेंगे
तुम्ही बनाओगे
जन्नत जहन्नुम
नहीं कोई और दुनिया
जब आना जाना ही नहीं
तो किसका हिसाब
किसकी किताब
नहीं कोई मुंसिफ
नहीं कोई जज
मुशाहिद जिन्हें
होना था
वो भटके रहे
तलाशते रहे लफ्जों
में उसको
शऊर में जिसको बांधा
वो खुला आसमां था
Comments
Post a Comment