इधर उधर बिखरे जहां में
इधर उधर इस बिखरे जहां में
जहां कपड़े फटे पुराने चीथड़े
लपेटने का दौर हो
ख़्याल हैवानियत से लदे फंदे
ग़ैर जिम्मेदाराना
और
बेतरतीबी से चलती भेड़ चाल
बेशुमार वाहनों से
सड़के अटी पड़ी
जहां सड़कों फुटपाथ पर
चलने की रवायतों को
दर किनार कर
चलना जहां मुश्किल हो चुका है
बेतरतीबी जिंदगी
इंसानी रगों का हिस्सा बन गई
पूरी कायनात शर्मिंदा होकर भी करे भी तो क्या करे
गूंजती है छोटे दुध मुहै बच्चों की चीखें
औरतों के साथ होते जघन्य दुर्दांत वहशी कारनामों
से कोई हांथ उन्हें बचा लें
दुहाई देती आवाज़ें
इन बेबस बेगुनाहों
जिस्मों से इनकी रूहों
इतनी बेतरतीबी से जुदा
करते ये बेरहम दिल
किन मांओं ने जन्में हैं
सुना था
धार्मिक किस्सों कहानियों
की किताबों में
हकीकत में
हैवान और फ़रिश्ते
लड़ते हैं ये तो सुना था
मौरडरन टैक्निक में
फ़रिश्ते इस दौड़ से
नदारद हैं
उनका सिर्फ़ नाम चलता है
मगर टैक्नीक की ये
ब्यूटी है की
लगता है कि
जंग है ईंसाफ की
ये तरक्की कर के
ये हुनर पाया है
तथाकथित इंसान ने
कहते नहीं हैं
मानते तो सब यही है
ये जंग है
झूठे अहम और धर्म की
इंसानियत की दुहाई में
कौन किसका साथ दे
इसी में दो पक्षों
फिर बंटा इंसान है
बचपन में सुनी थी
एक कथा धर्म युद्ध की
सुना था
आज हम बड़े सिविलाइज्ड हैं
फिर भी लड़ रहे हैं
उस पुरानी बात पर
कुर्बान कर रहे हैं
अपनी ही औलाद को
कुछ नया हम क्यों कर न सके
मैं सोचता हूं
तुम भी सोचो
एक बार टेलीफोन बूथ से जब पैसों की बरसात हुई।
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