अब मैं तुमसे रूबरू होता हूं
अब मैं तुमसे ही रुबरु होता हूँ
बताओ तो कौन हो
कहां से हो
कब से हो
मेरे इर्द गिर्द
कहां जाना है
क्या चाहते हो तुम
कुछ बोलते क्यों नहीं
कबसे तो मैं
तुमसे मुखातिब हूं
कह दो जो भी कहना है
मौका भी है
दस्तूर भी है
निभाना भी है
और और क्या
बाकी सब
तो
यहीं रह जाना है
तरूण कुमार
23/12/24
मुंबई
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