मुझे तो बिटिया चाहिए

*मुझे तो बिटिया चाहिए*

मुझे तो बिटिया चाहिए
मुझे तो बेटा चाहिए 
क्या हुआ ?
तुम्हारी मुराद 
बेटियां बाप की 
लाडली होती हैं 
उनका संसार होती हैं, 
दूसरे के घर का सम्मान होती हैं 
नहीं भेजूंगा कहीं अपनी 
लाडो को 
बचपन में मुनिया 
बाबा की लाडो
नाजों नखरों से संवरी
इतराती बलखाती इठलाती 
लहराती बहलाती
दामन में घुसती समाती
राहत की पुड़िया
तुतलाती मुस्काती 
दिन रात को महकाती, 
बस्ता ले चलती 
किताबें संभाले
डिग्री उछालती
मुक्त ख्याल सी, 
बाबुल की डेहरी से निकली
अम्मा से लिपटी
डोली में जाती 
पिया को संभाले 
अभी बच्चे संभाले
अब दुनिया संभाले,
दुनिया की हर जंग संभाले 
तुझे नाज़ से देखे दुनिया 
गली की हैवान नज़रों 
से बच कर 
किया नाम रोशन, 
तुम कब मुक्त ख्याल से
जीवन की व्याकरण 
एक इबारत बन गई
तू कब मां बन गई 
मेरी नन्ही बिटिया 
तेरे किस रूप को 
मैं कब तक निहारूं 
ढ़लक गई तेरी काया
पर जोश तुम्हारा
मेरुदंडिका वही रही 
तुम टूटी बिखरी सिमटी
और समेटा उफ्फ न किया 
तुम राह बनी 
तुम सबक बनी
बिटिया तुम कब बन गई 
पुरखिन, 
दादी आजी 
तुझे सौ सलाम 
जीवनदायिनी 

*तरुण कुमार शुक्ल*
8 मार्च 2026
रात्रि ०१:३४
लखनऊ 

Comments

Popular posts from this blog

रूदाद

मज़दूर दिवस