सुनो तो तुमको कैसे याद करूं

सुनो तुमको 
कैसे-कैसे याद करूँ मैं 
कैसे छू लूँ 
लिपटा कर मैं 
ख़ुद में भर लूँ 
ऐसे कैसे ?
जागती आँखो का सपना 
भूला बिसरा 
कोई पुराना 
गीत हो तुम 
यादों में बसी 
लम्हों का कोई 
हिसाब हो तुम 
लफ़्ज़ों में लिपटी 
एक मुक्कमल 
किताब हो तुम 
तुम क्या हो  
ये तुम क्या जानो 
गुन गुनगुनाना चाहता हूं 
शब्द सब ख़ामोश हैं 
सुन रहा हूं धुन पुरानी 
खुशबु तुम्हारी इर्द गिर्द है 
क्या कहूँ कैसे कहूँ 
तुम कौन हो!

*तरुण कुमार* 
03-11-2024
लखनऊ 

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