जंग के मायने

हड़प लिये गये हैं
भूख और बेरोज़गारी 
मजदूर के पसीने
के असल मायने
जंग में बिखरे 
मांस के लोथडे 
में फर्क करना
कल कारखानों से
गोला बारूद से
निकलने वाले 
धुयें में फर्क करना
बदलते दौर में 
बदलती इबारतें
अब चीखती हैं
अपने वजूद की
ख़ातिर 

तरूण कुमार 
२५\१२\२०२४

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