जंग जिनके दिलों में बसती है

जंग जिनके 
ज़हन में 
बसती है
उन्हें बस्तियों से
क्या लेना
आओ कुछ जीने के 
अंदाज ही बदलें
बहते खून के रंग को 
सफेद करने के 
तौर तरीके ही बदलें
तुमको कतलो गारत के 
नये अंदाज सीखने होंगे
कुछ बदले न बदले
इंसानियत अगर 
तुममें होती तो
इंसान होने को 
कोई क्यों कहता
तुमको तो 
औजारों का जखीरा 
रखना और 
उन पर धार तेज करना 
तुम मोहब्बत करना 
वो खुद ब खुद 
परमाणु बम 
में तब्दील होगा
किसी को कोई 
तकलीफ़ नहीं होगी 
उनके दुध मुहे बच्चे 
तो कबके फिदायीन 
हो चुके 
तुम उस गुनाह 
से साफ बच गये
कानून की 
किसी धारा में 
तुम पर कोई 
इल्ज़ाम नही
गुज़री नस्लें 
तुम पर फक्र करेंगी
तुमने जिस मोहब्बत 
से और
तरतीब से मोहरे 
बिछाये  
की कब्र में 
जाने की भी 
नौबत न आई
ऐसी बदनसीब 
मौतों को
देते तुमने
न सोचा 
जमाना भी कैसा
जिसने 
मौतों में भी 
इंसानो के फिरके
और झंडे पहचान
कर मातम में 
आवाज़ उठाई
न तुम बाज आये 
न वो बाज आये 
दानिशमंद 
फर्ज के झंडे 
लहराते शान्ति 
के गोले दाग कर
जंग ख़त्म होने से पहले 
अपनो के हक में
फैसला देने की 
होड़ में बढ़ गये 
तुमने जो इतिहास 
गढा और पढ़ा वो 
मरने वालों का
सत्य नही है
जो जिसके 
पक्ष में खड़ा था
ये उनकी अपनी 
अभिव्यक्ति 
भर से ज्यादा
कुछ भी नही
गुनाहों और शबाब 
का फैसला 
क़यामत के 
रोज भी होगा 
जिसकी खबर 
और इंतजार 
और नतीजा न जाने 
क्या होगा
क्या ये लेट लतीफी 
हमारी नसलों 
में वहीं से आयी है।

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