बात मुख्तसर सी इतनी है
बात सिर्फ इतनी सी
ही कहनी थी
की मेरी याददाश्त जाती रही
कमबख्त ख़ौफ के
मारे इश्क के झूठे
न जाने कितने
किस्से गढ़ गया
थोड़ी सी हिम्मत
जो जुटा ली होती
मोहब्बत के तरानों
से दीवान न भरते
वाह वाही
के चक्कर में
इंसान से मक्कार
हो गए हैं
अब हाल ये है
न वो हैं
न वो ज़माना
दो मीठी बातें कह के
ले उड़ा
कल्लन पहलवान
कमीना
आदाब अर्ज़ है
तरुण कुमार
लखनऊ
21/02/25
12: 06 दोपहर
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