बीते सालों में बड़ा काम हुआ है
कुछ सालों में बहुत बड़ा काम हुआ है
भाई इतना हिन्दू मुसलमान हुआ है
जानते न थे जो क से कुरान वो
अब अहले हदीस जानते हैं
वाक़िफ न थे जो राम से वो
रामायण और वेदों पुराण जानते हैं
गली गली तो क्या मोहल्लों के भी नाम हो गए रोशन दरो दीवार हो गए
ये क्या, लोग हिंदू ये मुसलमान हो गए
बाकी सबके नामों निशा भी मिट गए
होली और ईद बकरीद दिवाली दशहरा
त्योहारों के बस कुछ नाम भर रह गए हैं
सब सिमट के हिन्दू मुसलमान हो गए
आए हाय क्या ज़माना आ गया
न जाने क्यों अब हम इंसान नहीं
कुछ अर्से से बस हिंदू मुसलमान हो गए
अमा अरसा हुआ सुने बाकियों के नाम
सुना नहीं हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
नारा था न आपस में सब हैं भाई-भाई
अमां कहां खो गए मेरे दो भाई कुंभ में
जो लोग न जानते थे भाषाओं की दूरियां दो सगी बहनों का मज़हब तलाश लिया
उर्दू हिंदी को हिंदू मुसलमान कर दिया
ज़बान का भी तलाक करवा दिया जिनको ज़बान
का अलिफ़ बे क ककहरे से ताल्लुक न था ज़रा
हिंदू उर्दू से जन्मी
उनकी लाड़ली हिंदुस्तानी के बिना
एक पूरी
के घर बंटवारे की जिद पकड़ ली
क्या दौरे ज़माने में आ गए
खो दी है क्या
या गिरवी रख दिए ईमान हम सभी ने
अब सियासत दान बताएंगे कैसे
मनाएंगे त्यौहार हम सभी
रंग नहीं फेंकेंगे बिना जाने पहचाने कभी
क्या अब तमीजों तहज़ीब भी सिखाएंगी
सियासतें
हम किस दौर में हैं हमको ख़बर नहीं
मस्जिद ढकी गर जाएंगी इस खौफ से
क्या मुंह दिखाओगे ए हिंद वासियों
आने वाली नस्लों को क्या दे के जाओगे
करो अहद जुम्मे की नमाज भी पढ़ी जाएगी अपने वक्त पर
होली भी लोगों को देख भाल कर खेली जाएगी
हर रवायत को पूरे खुलूस से निभाना
हमें आता है हम उनको ये दिखलाएंगे
आवाम का ये फर्ज है
उनकी बंद हैं आँखें तो
हम अपना नज़ीर पेश करें
हर त्यौहार और रस्म अदा की जाएगी किसी पर छींटा भी रंग का न पड़ने देंगे बहुत सुन समझ लिया हिन्दू मुसलमान
कब तलक सियासत होगी इस नाम पर
हमारे वोटो पर पलने वाले सब तय नहीं करेंगे
हमारा ज़मीर हमने कभी रेहन में नहीं रखा है
जिंदा कौम है अगर हमारी तो
हम रस्म की राह में
रोड़ा नहीं लगाएंगे
राह नई बनायेंगे
सिविलाइज्ड हैं हम
सब शान से त्यौहार नमाज़ पढ़ाएंगे
यूं नहीं तुम दुनिया में
विश्वगुरु कहलाओगे
बंदिशें लगाना
आज़ाद मुल्क की पहचान नहीं
कुछ तुम सीखो कुछ हम सीखें
हम आने वाली नस्लों को भेद भाव
न देकर जाएं मिलकर चलना सिखलाते जाएं
कानून के ज़ोर पर इंसानियत
न पहचानी जाएगी।
कुछ हम समझे तब ये समझेंगे
इनकी ये ताला कुंजी
इनसे हम ऐसे ही छीन भी पाएंगे
ये लड़वायेंगे हम इनको तरसायेंगे
बहुत हो गया हिन्दू मुस्लिम
हम सब मिलकर इनको नया राग समझाएंगे।c
जुमा भी होगा होली भी होगी
न कोई दंगा न फसाद ही होगा
सभी मनेगा जैसे अब तक मनता था।
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