सुनो मुझे गरियाने का मन करता है

सुनो मुझे बहुत गुस्सा आता है 

गरियाने का मन करता है 

सड़क पर सभी इधर-उधर 

कहीं भी कभी भी 

कुछ भी करते हैं 

समझ लीजिये 

बिना सिग्नल दिए गाडी मोड़ भी देंगे 

और रोक भी देंगे

लाज़मी है ठोक भी देंगे ही 

अपने बाप का क्या जाता है 

लड़ने का चिल्लाने का मौक़ा मिलेगा 

घर का सारा फ़्रस्ट्रेशन 

भई यही तो निकलेगा  

समय की पाबन्दी 

हमारी छठी में 

रखी ही नहीं गयी 

हम एहसान फ़रामोशी के शीर्ष पर हैं 

झूठ कपट मक्कारी हमारी रगों में है 

उम्मीद हमसे ईमानदारी की 

सबको है जो हमतो हैं ही नहीं 

लेकिन दूसरे को मुगालता गजब का है 

तो है 

साली यही तो ठसक है 

बड़ी भद्दी गालियां देता हूँ 

आसपास के लोग कहते हैं 

अबे शीशा पिघला के डालते हो 

अपनी ज़बान से तुम 

खा गयी सरकार 

सारे हुकूक जनता के

हमारी पीसी मासी 

दिमाग से सरकी थी 

घूम-घूम कर गरियाती थी 

प्रधानमंत्री सुअर का  बोच्चा 

ये वाला या वो वाला 

साला क्या फ़र्क़ पड़ता है 

गरीबी हटाओ, गंगा बचाओ 

देश बचाओ, पक्का घर

काला धन घर वापस लाओ 

महंगाई हटाओ और 

डॉलर का दाम रुपइया जितना  

कहाँ गया, सब जुमला था 

दो करोड़ नौकरियां, भई जुमला था    

सब नारा दिया 

सोचा था 

सीनियर सिटीजन के सुख भोगेंगे 

उसमे भी आग लगा दी 

नारे सुनके आग लगती है 

मोटा-मोटा गाली निकलती है 

हमको गुस्सा बहुत आता है 

असहाय नहीं हैं, यूनिटी नहीं है 

गाली निकलती है 

सब साले धोखा देते हैं 

मोटी मलाई 

सब खाये बैठे हैं 

एक दुसरे का 

मुँह पोछने का काम कर रहे हैं 

जनता इन पर विश्वास कर रही है 

क्या पक्ष क्या विपक्ष 

बस गुस्सा आता है 

टीवी की न्यूज़ देख कर 

गाली देता हूँ 

घर से भी मुझे हकाल दिया है 

अब सड़क पर बैठ कर गाली देता हूँ 

पहले सड़को पर 

पानी पीने के बम्बे होते थे 

अब दरवाज़े दरवाज़े घूम रहा हूँ 

खाना पक्का घर कपड़ा पानी 

पीने वाला मांग रहा हूँ 

गाली देता हूँ, गाली खाता हूँ 

सब मुझको पीसी मासी 

का सा कहते हैं 

मैं वो नहीं कहता 

जो वो कहती थी 

मैं सीधे गाली देता हूँ 

तेरी छप्पन इंची छाती को 

क्या है तेरी ?

ये भी झूठ 

मुझे गुस्सा बहुत आता है 

गरियाता मैं रहता हूँ 

कहाँ गये भई नारे तेरे...  

वादे तेरे....  

   


Comments

Popular posts from this blog

मुझे तो बिटिया चाहिए

रूदाद

मज़दूर दिवस