नाराज़गी बेवफ़ाई
नाराज़गी, बेवफ़ाई, अश्लीलता,
तुम्होर गहने नहीं
तुम तुम्हीं हो तुम्हारा गहना.
ऐसे ख्यालों में आती है।
जैसे किसी विराने में
गहराता अन्धकार
और सहसा किसी का खिलखिला कर हँसना
दूर तक फिर बिखर सन्नाटा
आस पास फिर किसी का अहसास
जैसे सहरा में उभरती भागती
रेत को चिलमनों में धंसता जिस्म
भाग कर झाँकने उस्पार
करीब आता वो आसमान को छूता बवडर साँथ-साँय
नही खालो पालो हथेलियाँ
दूर से आती कोई अलाप गुज़रते वक़्त की बारात
शाम के धुंधलके में सुलगते अरमान
ऊंची उठती चिंगारी
दूर जाती आसमान में
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