आज तुम्हारी याद

आज तेरी याद आई तो आती चली गई 
पलकों पर सदियों की चादर सी तन गई
पल-पल ठहर कर मोना कुछ यूँ कह गया 
कभी आओ हमारे आँगन में छेडेंगे तार बचपन के 
गुनगुनायेंगे कोई गीत जवानी की बागबाँ का 
रह जायेगा कोई एक चेहरा-तुम्हारा 
यादों की कोठरी में कोई- तुम्हारा अपना 
यादों के वास्ते हो मुझको ही अपना कहलो 
हम कब हुये हैं किसके ऐसा चलन रहा है 
यादों में रह गये है नासूर से हैं गहरे 
हमको कोई क्यों संभाले
याद उफ़ ये यादें

तरुण कुमार शुक्ल 

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