वो पूछती हैं हाल मेरा

नींद खुल गई है 
 *वो मुझसे पूछती है* 
हर बार पूछती है 
तुम्हारे साथ कौन है
मैं कहता हूं बहुत कुछ है
दवाएं हैं, गोलियां हैं 
मिक्सचर है 
नहीं और कौन है
तुम्हारे साथ 
कोई है 
मैं कहता 
दिल है, धड़कने हैं 
ऐसा लगता है सांसे 
भी इधर उधर 
चलती फिरती
उठती बैठती 
अपनी मौजूदगी 
रजिस्टर में दर्ज़ करती हैं 
तुम्हारा ख़्याल रखने वाला 
कोई है 
मैं कहता हूं 
हां यादें हैं 
तन्हाई है 
मौसम की रुसवाई है 
बीते मौसमों की खुशबुएं हैं 
हैं तो साथ सभी का 
बस तुम सामने बैठी 
निहारा करती हो
आती ....
बस पूछती रहती है
तुम्हारे पास कौन है ?
इंतजार है 
अरसों की जुदाई है
फेहरिस्त में
लंबी सी अधूरी पड़ी 
कुछ ख्वाहिशें हैं 
लंबी दूरी तय करने 
वाले हमसफर की 
तलाश है
एक सफर लंबा 
वीरान है

तरुणकुमारशुक्ल
मुंबई 
८ फरवरी २०२६ 
प्रातः २:२८ मिनट 

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