कुछ तो लोग कहेंगे ही

वो अगर कुछ अलग है 
तो सवाल करो 
अगर बहुत अलग है 
तो सवालों से भी परे है 
तुम पर जो अपनी पूरी क़ायनात लुटा दे 
उससे भी सवाल करते हो 
तो तुम अपने को तौलो 
उसको तो इस दायरे में मत घसीटो
कैसे समझ गये तुम उसकी भाषा को 
पहले ये बतालाओ 
अंतर्मन में चला जो तुम्हारे 
उसको तुमने गढ़ा
उसका बतला कर
तुम अपनी हस्ती पहचानो

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