तुम वही हम भी वही

तुम वही 
हम भी वही 
फिर बदला 
तो क्या बदला 
कसक वही 
शिद्दत भी वही 
पहली वाली 
न तुम पहचान सकी 
और मैं तो 
सवाल के जवाब में 
अब तक 
इंतज़ार में 
वो उम्मीद वो बेकरारी 
आज भी 
न जाने क्यों 
वैसी की वैसी 
मेरे साथ है
कहीं नहीं जाती 
कोई वादा 
कोई करार 
न तब 
न अब 
ये बताओ मुख्तसर में 
यही सब तुम्हारे साथ 
अभी तक है 
की नहीं 

तरुण कुमार 
२५/१२/२०२४
मुंबई

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