आधा है चन्द्रमा

वो अध् खुले होंठ
वो हलके से तैरती मुस्कराहट
वो अध् खुले नयन वो हौले से तैरते सपने
वो अध् खुले केश
वो मंडराते खोये से ख्याल
वो अध् खुला जिस्म
वो मंद मस्त पवन के झोंके
वो अध् खुले लबों से
वो हलके ढलकते अल्फाज़
वो आधी रात
वो आहिस्ता ढलता आधा चाँद
वो थोड़ी सी थकन
वो लहराती सी अंगडाई
वो अध् मिला दिल
वो कोसों बढती दूरी
वो आधा यकीन
वो सदियों का फासला
पूर्णता की तलाश में
वो आधे उठे क़दम
अर्ध अर्ध जो देखता रहा
वो धीरे धीरे एक हो गया


तरुण कुमार
१४ जनवरी १९९६
मुंबई

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