नई दौलत पुराने दोस्त
[16/12/2024, 5:57 pm] Tarun Kumar:
नई दौलत या पुराने रिश्ते
देखना है तो
इंसानियत देखो
वहशियत का क्या करोगे
कागज़ी काबिलियत
[16/12/2024, 6:11 pm] Tarun kumar Shukla: सम्हालना है तो
क्या सम्भालोगे
किसी को गिरा के उठाने में कोई बात
गिरते को सम्भालोगे तो कोई बात हो
जरा सी ठोकर से बिखर जाते हो
जब चट्टान से टकराओगे
वो अस्ल खेल होगा
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