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Showing posts from December, 2025

मज़दूर दिवस

मज़दूर दिवस  रात अँधेरी शीत बयार दिन का मेहनत कस इंसान दुनिया से बिंदास दिन के सपने रात के सपने कैसे मिलते होंगे कैसा बचपन कैसी जवानी कैसा है इन बूढों का बुढ़ापा कई दर्द कई तकलीफे होंगी कैसे सोते हैं ये खुलकर, नहीं छुपा  है इनका जीवन खुले गगन में चाँद के नीचे दिन की तपन को भूलके कैसे मस्त पड़ें कैसा होगा  जो इनके सपनों सौदा करता होगा क्या होगा कैसा होगा इनके हिस्से का सपना  शायद करतें हो ये दुआ अबके सावन में इतना पानी न बरसे अबकी गर्मी में इतनी लू न चले होगा इनका भी सपना आओ हमभी दुआ करें इनकी भी अपनी  छत हो जहां बसे इनका भी घर चार दीवारें इनकी हो इक दरवाज़ा हो स्वागत का जहां  खड़े हो इनकी गृहणी इनके बच्चे हाँथ में   इनके थैला हो थैले में थोड़े ही चाहे पर सुन्दर से सपने हों सुबह का सूरज इनके द्वारे दस्तक दे आओ हम भी  दुआ करें इनका भी अपना जीवन हो आँखों में अच्छे  सपने हों तरुण कुमार M...

फैज़ तुम्हारी अज़मत

ज़िंदगी इसी रौब का नाम है फैज़  तुमको देखो तो तुम्हारी आंखों में  धधकते हैं इल्म से लबरेज़ शोले  तुम चलो तो छलक पड़ते हैं  कदम ब कदम इंकलाब के नारे  राहों में जैसे उठते है शोलों के अंबार  तेरी आवाज़ पे उठ के चल पड़ते हैं  जवान बूढे औरतें अपने घरों से हम क्रांति को तो नहीं जानते हैं  उत्पीड़न को जानता हूं,  भूख को शिद्दत से महसूस किया है  जंगली शेर को शिकार करते तो नहीं देखा हां  हवस से भरी आंखों को चीखते टूटते  जिस्म को नोचते देखा है बारहा बार देखा है  प्रकृति के नियमों में तो यूं ही पल गया मगर इंसानी उसूलों को कुचलते  इंसानों को खूब देखा है चलो आओ मेरे साथ  हर गली हर मोहल्ले में  इंसानों के ईमानों की दुकानें हर तरफ  नीलामी पर चढ़ी हैं तुम क्या खरीदोगे क्या बेचोगे  ख़ुद का गिरेबां कौन सा पाक है पागल इस भरे बाज़ार में तुम बिल्कुल भी तन्हा  इक पल नहीं पाओगे कुछ इश्क किया कुछ काम किया  फिर आख़िर तुमने अज़ीज़ आकर  न इश्क किया न काम किया  दोनों को ही छोड़ दिया  ये भी क्या कोई कम...

कुछ की तलाश

मंज़िल तलाशते रहे  मंज़िल की खेरों ख़बर  न मिली  मुझे मेरे इश्क ने डुबोया  किसी और की क्या बात करें तुम न होते तो  कोई और होता तो  क्या कुछ में  कुछ ढूंढता है  कोई  मुक्कमल सा  क्या कुछ  मिलता भी तो  मंज़िल समझ कर  रुक जाते  या सांस थमने  तक मुक्कमल  मंज़िल की तलाश रहती   *तरुण कुमार*  *लखनऊ*  *४ दिसम्बर २०२५* *१०:११ सुबह*